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31 Jul 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
सैद्धांतिक प्रश्न
दिवस 40: अनीता एक युवा IAS अधिकारी हैं, जिन्हें राज्य डिजिटल गवर्नेंस मिशन (SDGM) की निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। उनके विभाग द्वारा एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत नागरिकों के स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, भूमि और पुलिस से जुड़े डेटा को JanSuraksha ID नामक एक एकीकृत डिजिटल पहचान प्रणाली में समाहित किया गया है। इसका उद्देश्य सेवा-प्रदान को सुगम बनाना, भ्रष्टाचार को कम करना तथा कल्याणकारी योजनाओं की अधिक प्रभावी लक्ष्यित पहुँच सुनिश्चित करना है।
हालाँकि, नागरिक स्वतंत्रता समूहों और डेटा गोपनीयता से जुड़े विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रणाली में डेटा सुरक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं है, नागरिकों से स्पष्ट सहमति नहीं ली गई है और क़ानून-प्रवर्तन एजेंसियों या निजी कंपनियों द्वारा इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक आंतरिक ऑडिट के दौरान अनीता को पता चलता है कि जिस निजी कंपनी को डेटा एनालिटिक्स का कार्य सौंपा गया है, उसने बिना विभाग को सूचित किये प्रोजेक्ट का एक हिस्सा एक विदेशी सब-कॉन्ट्रैक्टर को सौंप दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि कुछ नागरिक डेटा का उपयोग अप्रत्यक्ष रूप से व्यावसायिक कंपनियों को पूर्वानुमान संबंधी विश्लेषण बेचने के लिये किया जा रहा है, जिससे लक्षित विज्ञापन चलाये जा सकें।
जब अनीता अपने वरिष्ठों के समक्ष यह मुद्दा उठाती है, तो उसे कहा जाता है कि वह इस मामले में कोई ढिलाई न बरतें, क्योंकि इस परियोजना को राजनीतिक समर्थन प्राप्त है और इसे शासन में ‘गेम-चेंजर’ के रूप में सराहा जा रहा है। अब अनीता पर विधानसभा चुनावों से पहले इस परियोजना को क्लीन चिट देने का दबाव है।
A. इस स्थिति में अनीता के समक्ष कौन-सी नैतिक दुविधाएँ हैं?
B. उसके समक्ष कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं? प्रत्येक के परिणामों की समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये।
C. आप किस प्रकार की कार्रवाईयों का सुझाव देंगे? अपने उत्तर को नैतिक तर्कों द्वारा स्पष्ट कीजिये।उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- लोक कल्याण बनाम निजता, सत्यनिष्ठा बनाम राजनीतिक दबाव और पारदर्शिता बनाम निजता जैसे परस्पर विरोधी नैतिक सिद्धांतों का अभिनिर्धारण कीजिये।
- अनीता के लिये उपलब्ध विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कीजिये तथा विधिक, नैतिक और व्यावसायिक मानकों को ध्यान में रखते हुए संभावित परिणामों का मूल्यांकन कीजिये।
- नैतिक तर्क के साथ एक स्पष्ट सुझाव दीजिये, जिसमें सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास के महत्त्व पर वल दिया गया हो।
परिचय:
राज्य डिजिटल गवर्नेंस मिशन की प्रभारी IAS अधिकारी अनीता, एक ऐसी परियोजना, जो सुशासन के लिये नागरिक डेटा को एकीकृत करती है, की देखरेख कर रही हैं। हालाँकि, डेटा निजता, सहमति का अभाव और नागरिक डेटा के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दे अनीता के लिये गंभीर नैतिक दुविधाएँ उत्पन्न करते हैं।
मुख्य भाग:
हितधारक:
हितधारक
भूमिका/हित
अनीता
SDGM की निदेशक, परियोजना के नैतिक कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये ज़िम्मेदार।
नागरिक स्वतंत्रता समूह
निजता और डेटा सुरक्षा के पक्षधर।
डेटा निजता के पक्षधर
दुरुपयोग और नागरिक सहमति के मुद्दों को लेकर चिंतित।
निजी विक्रेता
परियोजना के डेटा एनालिसिस और आउटसोर्सिंग भाग का प्रबंधन।
विदेशी सब-कॉन्ट्रैक्टर
विभाग को सूचित किये बिना डेटा एनालिटिक्स को आउटसोर्स करना।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
राजनीतिक समर्थन के कारण अनीता पर मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने का दबाव डालना।
नागरिक
डेटा दुरुपयोग के संभावित लाभार्थी या पीड़ित।
वाणिज्यिक कंपनियाँ
लक्षित विज्ञापन के लिये डेटा का उपयोग करने में रुचि रखती हैं।
A. अनीता के समक्ष नैतिक दुविधाएँ:
- इस स्थिति में अनीता को कई नैतिक दुविधाओं का सामना करना पड़ता है:
- निजता बनाम लोक कल्याण: इस परियोजना का उद्देश्य सेवा वितरण को बेहतर बनाना है, लेकिन स्पष्ट सहमति के बिना व्यक्तिगत डेटा का संभावित दुरुपयोग करके नागरिकों की निजता को खतरा है।
- सत्यनिष्ठा बनाम राजनीतिक दबाव: अनीता पर अपने वरिष्ठों द्वारा इस परियोजना को मंज़ूरी देने का दबाव है, जबकि वह जानती है कि यह डेटा सुरक्षा संबंधी नैतिक मानकों का उल्लंघन कर सकती है।
- पारदर्शिता बनाम निजता: नागरिक डेटा की आउटसोर्सिंग और मुद्रीकरण के संदर्भ में पारदर्शिता की कमी शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की उसकी ज़िम्मेदारी के साथ असंगतता उत्पन्न करती है।
- जवाबदेही बनाम दुरुपयोग: स्पष्ट सहमति के बिना व्यावसायिक उद्देश्यों के लिये डेटा का दुरुपयोग अनैतिक है, जिससे सरकारी पहलों में जनता के विश्वास को कम करने का जोखिम उठाता है।
B. अनीता के लिये उपलब्ध विकल्प और परिणाम:
- विकल्प 1: बिना किसी चिंता के परियोजना को मंज़ूरी द
- परिणाम: इससे परियोजना को राजनीतिक समर्थन प्राप्त होने का संकेत मिल सकता है, लेकिन यह नैतिक सत्यनिष्ठा, निजता और पारदर्शिता से समझौता करता है। अगर यह मुद्दा बाद में सामने आता है, तो इससे जनता में आक्रोश और कानूनी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- विकल्प 2: उच्च अधिकारियों/मुखबिरों के समक्ष अपनी चिंताएँ व्यक्त करना
- परिणाम: अनीता उच्च अधिकारियों या मुखबिरों के समक्ष अपनी चिंताएँ व्यक्त कर सकती हैं। इससे नैतिक अखंडता तो बनी रहेगी, लेकिन इससे राजनीतिक टकराव, संभावित प्रतिशोध और कॅरियर संबंधी जोखिम भी हो सकते हैं। हालाँकि, इससे नागरिकों की निजता की रक्षा होगी और डेटा के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा।
- विकल्प 3: चिंताओं के समाधान के लिये संशोधन का अनुरोध करना
- परिणाम: अनीता अनुरोध कर सकती हैं कि परियोजना में उचित डेटा सुरक्षा तंत्र और नागरिक सहमति प्रोटोकॉल शामिल करने के लिये संशोधन किया जाए। इससे परियोजना में विलमब हो सकत है, लेकिन इससे जनता का विश्वास और पारदर्शिता बेहतर हो सकती है। हालाँकि, इसे प्रशासनिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है और यह राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय भी हो सकता है।
C. अनुशंसित कार्यवाही:
- अनीता को विकल्प 2 चुनने की सलाह दी जानी चाहिये: वह उच्च अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएँ उठाएँ या मुखबिर से बात करें। यह नैतिक रूप से सबसे ज़िम्मेदार कार्यवाही है, क्योंकि यह सार्वजनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के सिद्धांतों के अनुरूप है।
- हालाँकि इसमें व्यक्तिगत और व्यावसायिक जोखिम हो सकते हैं, अनीता का कर्त्तव्य नागरिकों की निजता की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी कार्य जनता के विश्वास को बनाए रखें। इसके अतिरिक्त, चिंताएँ उठाने से परियोजना की समीक्षा की आवश्यकता होगी, एथिकल गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित होगा।
- यह निर्णय नैतिक तर्क पर आधारित है, क्योंकि यह मूल अधिकारों की रक्षा करता है और व्यावसायिक लाभ के लिये नागरिकों के डेटा के शोषण को रोकता है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करके, अनीता परियोजना की सत्यनिष्ठा की रक्षा करेंगी तथा शासन में दीर्घकालिक सार्वजनिक विश्वास को बढ़ावा देंगी।
निष्कर्ष:
जैसा कि इमैनुएल कांट ने उचित ही कहा है, “केवल उसी सिद्धांत के अनुसार कार्य करें जिसके द्वारा आप यह इच्छा कर सकें कि यह एक सार्वभौमिक कानून बन जाए।” नैतिक कर्त्तव्य के इस विचार को अनीता के कार्यों का मार्गदर्शन करना चाहिये तथा यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके निर्णयों में निजता, निष्ठा और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जाए तथा ऐसे सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करें जो सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य हों।